Aar Paar | रामलला टाट में या ठाठ में !| 2019 से पहले राम मन्दिर का रास्ता साफ़? | #AyodhyaVerdict


प्लीज सब्सक्राइब एक्सप्रेस वे लाइक टो गेट नोटिफाइड व्हेन ई अपलोड ए न्यू वीडियो चुनाव की विशाल पूछेगी क्या राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया है क्या सियासी पार्टियां मंदिर मार्ग पर अप बोर्ड की है कोठी तीन जजों की खंडपीठ ने बेचने का फैसला सुना है जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने बताया कि अयोध्या विवाद जमीन का विवाद है साथी कोट 1994 के फैसले पर पुनर्विचार करने से साफ इंकार कर दिया साफ मना कर दिया यह भी साफ कर दिया कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का जरूरी हिस्सा कतई नहीं है बहुमत से आए फैसले के बाद विवादित जगह पर इसका मालिकाना हक है इस पर 19 अक्टूबर से सुनवाई शुरू होगी जिसको कपिल सिब्बल 2019 तक टालना चाहते थे और क्या वाकई से सियासी कॉल करना है और उन लोगों को बड़ा झटका लगा है जो लोग सुनवाई को लटकाने के लिए बार-बार अड़ंगा डलवाने की कोशिश कर रही है कर रहे थे इसलिए हम सवाल यह है कि क्या इस फैसले के बाद अब मंदिर करा साफ हो गया है मतलब रामलला अब कहां होंगे साथ में था कि देश की सबसे दमदार डिबेट सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को एक वर्ग बड़ी जीत के तौर पर देख रहा है जिस फैसले में कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाज़ इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है तो क्या समझा जाए कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है जो औरंगाबाद उन्होंने इस को दोबारा सुनवाई होनी चाहिए 5 जज बेंच का अब हट गया है अब रास्ता साफ हो गया है राम मंदिर पक्का बनेगा बीजेपी के कद्दावर नेता स्वामी को भले ही कोर्ट जीत नजर आ रही हो लेकिन अयोध्या के पुजारी राम विलास वेदांती जी ने साफ कह दिया है कि इस फैसले से मंदिर निर्माण का कोई लेना देना नहीं है इतना ही नहीं वेदांती ने केंद्र सरकार को खेलते हुए कहा कि यूपी और केंद्र सरकार से उन्हें मंदिर निर्माण की कोई उम्मीद नहीं है मोदी से मोदी का आसान नहीं है किसी प्रकार से इतना 4 साल हुआ लेकिन राम मंदिर के विषय में कुछ भी प्रयास नहीं किया अभी जब कोर्ट ने कह दिया था कि आप लोग आपसी समझौता कर लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा आइए समझते हैं 3 जजों वाली बेंच में इस मामले पर दो जज चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की एक राय रही जबकि जस्टिस नजीर की राय अलग रही कोर्ट के मुताबिक मुस्लिम पक्षकार की याचिका 21 के अंतर से मानी नहीं गई यानी सुप्रीम कोर्ट ने मारा की मस्जिद में नमाज़ इस्लाम का आंतरिक हिस्सा नहीं है साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि अयोध्या विवाद धार्मिक विवाद नहीं है बल्कि जमीन का विवाद है इस फैसले से यह भी साफ हो गया कि विवादित जगह पर किसका मालिकाना हक है इस पर सुनवाई होगी इस्माइल फारूकी केस में जो जजमेंट था उस जजमेंट से एक कंफ्यूजन होता है वह कंफ्यूजन अभी भी बरकरार राम की जन्म भूमि पर राम का मंदिर चाहिए और कोई मंदिर के सवाल खड़ा होता है उसको जाने में समय नहीं लगता लेकिन इसको अनावश्यक देरी हो रही है तक हिंदू समाज आक्रोशित को मिला है उसका मतलब था और अगर यह पूरे देश की सुप्रीम अदालत ने सुनवाई का रास्ता तो खोल दिया लेकिन क्या इससे मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया यह कहना मुश्किल है आज इसी मुद्दे पर होगी देश की सबसे बड़ी बहस रामलला ठाट में या हाथ में सबसे बड़ी बहस देश किसी पर है और विश्लेषण सुनिए राम मंदिर का रास्ता साफ होने कम स्टेशन नमाज पढ़ना मस्जिद का नमाज पढ़ने मस्जिद का अभिन्न हिस्सा नहीं है इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है अयोध्या पर जमीन विवाद को लेकर सुनवाई होगी 19 अक्टूबर से अयोध्या केस की सुनवाई शुरू होगी सुनवाई में अड़ंगा लगाने वालों की मनसा को यह बात बड़ा झटका है कपिल सिब्बल जैसे लोगों को यह बड़ा झटका है जो चाहते थे 2019 के चुनाव इसकी बात ही ना हो वैसे मेरे साथ इस्लामिक स्कॉलर है साध्वी खोसला इस भैंस के अंदर है राहुल गांधी की अभी स्वागत है चलिए मैं तो अपनी भैंस का में संबित पात्रा इस समय है मैं संबित पात्रा सीधा आपके पास आता हूं और आपका रुक करता हूं मैं बहुत चाहता हूं संबित पात्रा यह फैसला दुखी राम लला कई वर्षों से स्टार्ट में है क्या वह ठाट में आएंगे क्या उसके लिए मील का पत्थर है और जिस तरह से कहा गया कि नमाज पढ़ने मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है उसके मायने क्या है अमित बुरा बात ना माने और मुझे अगर एक सेकंड और दे तो मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं कि आज कांग्रेस के प्रवक्ता क्यों नहीं है आप अगर बोलना चाहे तो प्लीज चर्चा में शामिल होना मुनासिब नहीं समझा से दूर रहना चाहते हैं विवाद से दूर रहना चाहते हैं अमित जी मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब दूंगा मगर आपके इस चैनल के माध्यम से सुने पूरा हिंदुस्तान की यह जो नकली फैंसी ड्रेस इच्छाधारी हिंदू हैं आज इनका पहले पर्दाफाश हुआ है सुबह से उठकर हम न्यू धारी हैं हम मंदिर जाएंगे हम शिव भक्त हैं शिव भक्त राम भक्त श्री राम 111 1011 राहुल गांधी और आज छुप के बैठे हैं कौन सी मस्जिद में छुप कर बैठे हैं बुलाइए उनको जरा आज जब राम के ऊपर इतना बड़ा निर्णय हुआ है आज इतना बड़ा विषय आया है कि जो अड़ंगा डालने का चेस्टर किया जा रहा था रुकावट जो की जा रही थी राम मंदिर के निर्णय में उसमें ऐतिहासिक फैसला हुआ है तो यह सारे तथाकथित शिवभक्त का आप देखिए जरा यह नकली शिवभक्त मानसरोवर गए थे किस प्रकार खिलवाड़ कर रहे थे हिंदुओं के जन्मों के साथी हम तो मानसरोवर गए हैं हम हिंदू हो गए हम जनेऊ धारी हिंदू हैं हम शिव शिवजी की आरती अर्चना करते हैं आज उनका पर्दा खुला है देखिए जिस दिन ट्रिपल तलाक के ऊपर बयान 1 सेकंड 1 सेकंड अमित भाई मुझे बोलने दीजिए दिल की भड़ास है यह एक्सपोज करना चाहिए हमें कांग्रेसियों को पहली बात यह बताइए कि जिस दिन तलाक के विषय में कोर्ट ने निर्णय लिया था इस सरकार ने ऑर्डिनेंस किया था उस दिन भी चुप के बैठे थे उस दिन भी निकल के सामने नहीं आए थे क्यों यह घर शिव भक्त हैं तो शिव सर सदैव पार्वती के लिए सिर्फ सदैव नारी की शक्ति के लिए खड़े होते हैं खड़े वे उस दिन उस दिन बड़ा है उनको हिंदू-मुस्लिम हो गया और आज फिर अपिजमेंट पॉलिटिक्स के घर में छुपे हुए दिन बंधुओं इन नकली हिंदुओं को पहचान हो जाना अब आपका जो सवाल उठता है कि उसमें क्या हुआ है देखिए आज कोर्ट में बहुत बड़ा फैसला हुआ है मैं बता क्यों बहुत बड़ा फैसला के कुछ लोगों ने अड़चन डालने की कसम खा रखी थी कि किसी भी कीमत पर रामलला का जो रत चल रहा था कोर्ट में जो सुनवाई हो रही थी संवैधानिक तरीके से कि मंदिर के विषय में किस प्रकार आगे निर्णय क्या होगा याद करिए कपिल सिब्बल जी ने कोर्ट में खड़े होकर क्या कहा था लेकिन सिब्बल जी जो सुन्नी वक्फ बोर्ड को रिप्रेजेंट करते थे उन्होंने 2019 डाल दिया जाए उन्होंने कहा पर नहीं डालोगे तो मैं कोर्ट को बॉयकॉट कर दूंगा उन्होंने कहा था 19 में चुनाव प्रभावित हो जाएगा और आज यह सारे रंगे हटे हैं और मस्जिद इस नॉट इंटीग्रल में सेंशुअल पार्ट ऑफ़ इस्लाम मस्जिद का सम्मान हर कोई कहता है कोर्ट ने भी कहा कि हम सम्मान करते हैं राजेश की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया था कि मस्जिद एसेंशियल नहीं है उसको सेंड किया उसको अप्प ओल्ड किया किस्स आफ जजेस ठीक है पर जाने के बचे कैसे चली जाती है 2 साल तो उसी में सुनवाई होती रहती मैं मैं मैं सीधा रूप करता हूं फिरंगी मैं नहीं साहब आपका बहुत क्लियर नहीं कहा गया कि मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है जरूरी हिस्सा नहीं है और अब 29 अक्टूबर से अयोध्या केस की सुनवाई होगी आपको लगता है कि वाकई लगभग लगभग 1885 में पहला केस हुआ और देश आजाद होने के बाद 1950 में दूसरा किस वाद विवाद का हल निकलना चाहिए जब यह साफ हो गया है मस्जिद में नमाज़ इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है कि ऐसे बयान दिए जा रहे हैं कि जैसे लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल वर्डिक्ट मंदिर के समीर के लिए दे दिया हो जबकि जो अयोध्या का केस है उस के एक हिस्से पर आज कोर्ट ने अपना अपना ऑब्जर्वेशन दिया है कि भाई इस्माइल फारूकी का केस जो है इस्माइल फारूकी का उस सिलसिले में कोर्ट ने कहा है कि उसको लार्जर बेंच को रिफर नहीं किया जाएगा साथ ही यह भी बात कही गई है जिस्मफरोशी के केस का कोई असर अयोध्या केस पर नहीं तो नहीं पड़ेगा यानी कि आस्था और बिलीव कोकन अब जहां तक का मामला है जहां तक मस्जिद और नमाज़ का मामला है जो बीच में लीगल अपनी जगह लेकिन जहां तक मजहब पूरी तरह से साबित करने के लिए पैदा करने के लिए मस्जिद और नमाज़ 224 इंटीग्रल पार्ट ऑफ इस्लाम इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है इस पर आप क्या कहना चाहते हैं और क्यों फिरंगी मैरी साहब कह रहे उस पर जवाब आपका आपसे बहुत प्यार करता हूं लेकिन अपने पैनल पर अंसार रजा जैसे मूवी गुंडे को बिताएंगे जो आदमी को और औरंगजेब को अपना हीरो बोलता है तो इन लोगों के साथ में डिलीट नहीं कर सकता आपको उठना चाहिए देखे फिरंगी महली साहब ने मैं सम्मान करता हूं उनका और मैं इस्लाम का भी सम्मान करता हूं मस्जिद का भी और नमाज़ का भी सम्मान करता हूं करना भी चाहिए हर किसी को एक दूसरे के मजहब का मगर अभी अभी फिरंगी महली आपने कहा की मस्जिद इन इंटीग्रल पार्ट ऑफ इस्लाम जबकि 1994 में भी पांच जजेस की खंडपीठ ने और आज 3 जजेस ने किस प्रकार जिसमें सीबीआई खुद मौजूद थे उन्होंने कहा कि नॉट इज नॉट इन इंटीग्रल पार्ट उसके बाद भी आप कहेंगे संविधान की बात को भी नहीं मानेंगे कोर्ट की बात को भी नहीं मानेंगे तो यह दुखद भी है मगर फिर भी मैं यह बात सम्मान से कहूंगा दूसरी बात जहां तक आस्था और टाइटल सूट का भी चाहिए महिलाओं के अधिकारियों पर भी इनका आस्था जाता है और याद करे कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े होकर कहते हैं कि जो राम का नाम है क्यू ट्रिपल तलाक है जैसे राम है वैसा ट्रिपल तलाक के ट्रिपल तलाक आस्था बन सकता है ग्रामीन के लिए आस्था का विषय नहीं बन सकते हैं अब कोई मान मनोबल नहीं हो सकता जिससे बार-बार अब तो तू के अक्टूबर 29 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर कर दी गई है और अभी भी हम सुप्रीम कोर्ट की मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का भिन्न ऐसा नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट की बात कह रही है और 21 की और 1994 में भी यही बात कही थी उसके बाद हम मानने को तैयार नहीं है तो क्या किया जाए बताइए अब रामलला के पैदा होने की जगह तो नहीं बदली जा सकती ना मैंने यह बात और उसकी जो कि जो कुछ भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है उसका हम लोग शराब करते हैं लेकिन जहां तक हमारे मजहब का ताल्लुक है तो यह मजहबी कानून है मजहबी चीज है कि की मस्जिद और नमाज़ 2000 इंडिया हमारे मजहब काम करते हैं कई बार किस मसले को हल करने के लिए हर लेवल पर बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन न्यू टू पॉलीटिकल इंटरफेयर इन से मतलब बातचीत से हल नहीं हो पाया हम लोगों ने सब ने मिलकर या कानूनी रास्ता है प्यार किया है कि सब बड़ी अदालत मूल की जो फैसला दे दो कि उस पर हमला कोर्ट के प्रोसीडिंग्स को और और पॉलिटिक्स को सियासत को इलेक्शन को एक दूसरे से जोड़ना समझते हैं कहीं को लाया गया बता दीजिए जो लोग कह रहे हैं जो लोग यह कह रहे हैं कि 2019 से पहले कोर्ट का फैसला आ जाएगा और राम मंदिर का वहां की वहां की शादी हो जाएगी उनके पास ईकोर्ट को कैसे मालूम चल गया कि 2019 से पहले फैसला जजमेंट के पेपर उनकी उनकी पत्नी होने डिलीटेड सोनी है यह सही तौर पर आगे चली जिसमें काफी लंबा अरसा लगने की उम्मीद है देखिए पहली बात तो है कि खुद सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि चुनाव पर प्रभाव पड़ेगा 19 के बाद ही सुनवाई होनी चाहिए जहां तक जो लोग कह रहे हैं कि 19 से पहले भी सुनवाई हो सकती है आपने कल आधार का केस देखा था लगातार 38 डेज के अंदर सारे कागजों का शूटिंग नहीं करने के बाद हर दिन सुनवाई करने के पश्चात आधार का जो पूरा का जजमेंट आया वह अपने आप में ऐतिहासिकता और स्टीवन अर्थात 5:00 बजे की खंडपीठ बैठी थी और लगातार वह सुनवाई कर रही थी ठीक उसी प्रकार एक बार ज्यादा के केस में कौन नहीं है सामने रखा है उन्हीं को जांच करने के पश्चात क्या रामलला जोटाक में थे वह ठाट में आएंगे फैसले के बाद क्यों किया फ्रॉम सपोर्टर है राहुल गांधी की क्या आपको लगता नहीं है कि कांग्रेस को अगर राम भक्त है शिव भक्त है तो राम मंदिर की कुल की बैटिंग करनी चाहिए क्यों नहीं सबसे पहले तो देश के सभी राम भक्तों को मेरा जय सियाराम देखिए मिस्ट्री में मेरे लिए आस्था है राम मेरे लिए भगवान हैं राम मेरे लिए आदर्श है राम मेरे लिए राजनीति नहीं है राम भाजपा के लिए राजनीति है होई सोई वही जो राम रचि राखा होगा जो राम ने रचा है राम मंदिर तभी बनेगा जब भगवान राम जाएंगे अगर भाजपा चाहती तो 27 सालों में राम मंदिर बना सकती थी भाजपा के लिए राम मंदिर सिर्फ सियासी रोटियां एक्ने का एक मुद्दा था 27 सालों से भगवान राम के नाम की राजनीति करते आए हैं संबित पात्रा जी करते हैं मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि अब तो आप राम मंदिर के नाम पर वोट मांगते थे और जब तक ऑर्डिनेंस आफ ट्रिपल तलाक साडे 4 साल से आपके लोकसभा में बहुमत है उत्तर प्रदेश में आप की सरकार है रिपोर्ट बहुमत के साथ क्या क्यों आप राम मंदिर के लिए ऑर्डिनेंस नहीं ले राम मंदिर जयपुर रामलला की वजह से आप इस समय देश में परचम लहरा रहे हैं क्या खिलाएंगे सदरी को चाचा प्वाइंट लेकिन किस नेता का समर्थन कर रही है जिस नेता का समर्थन कर रही है उन्ही के बड़े ने उन्हीं के नेता कपिल सिब्बल राम मंदिर के खिलाफ राम मंदिर के खिलाफ कड़े ते देश की सर्वोच्च अदालत के अंदर के मंदिर नहीं बनना चाहिए ऑर्डिनेंस की मोदी सरकार स्कूटी प्राइस मेरे साथ तसलीम रहमानी साहब सो गए लेकिन इस दौर में संबित पात्रा में आपका 30 सेकंड में जवाब दो शादी को 40 सवाल पूछे थे कि आप ऑर्डिनेंस जाएंगे यह बड़ा सवाल आपसे पूछा गया बताइए टॉप में है उनको ठाट में लाएंगे 30 सेकंड में जल के महत्व बिल्कुल कहता हूं ठाट दिखे रामलला को कोई खास नहीं ला सकता रामलीला हमेशा ही ठाट में रहते हैं अर्थात स्वर्ग अप में रहते हैं हम सब के दिलों में रहते हैं और हां मंदिर हम बनायेंगे मगर में साध्वी खोसला जी जो कांग्रेस की समर्थक है राहुल जी की समर्थक हैं मैं उनके किसी भी प्रश्न का जवाब देना उचित नहीं समझता हूं आज वह जवाब दे कहां छुप कर बैठे हैं राहुल कहां छुप के बैठे हैं उनके सारे प्रवक्ता यह शिवभक्त बनते हैं कहां छुप के बैठे हैं कौन सी मस्जिद में नमाज नमाज अदा कर रहे क्यों नहीं आ रहे हैं रामलला उनको इतने प्यारे हैं उनके नाम राम जी की विश्वास अभी फोन करके पूछिए कौन से मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे हैं क्यों छुप के बैठे मुझे बताइएगा डिबेट के आगे बहुत जो तू कह दिया गया कि मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है जरूरी हिस्सा नहीं है क्या कहना चाहते हैं कि माननीय कोर्ट ने जो बात कही है वह सर आंखों पर लेकिन मस्जिद इस्लाम का हिस्सा है और कयामत तक रहेगा उसे कोई अलग नहीं कर सकता मैं नमाज की बात कर रहे हैं मगर जो होती है वह आज ही के लिए होती है और जो चीज हमारे पैगंबर ने कायम कर दी है वह कयामत तक के लिए हो गई है कौन क्या कह रहा है मैं बहस इस बात से नहीं है लेकिन एक बात हम आपको बता दें कि मस्जिद इस्लाम का हिस्सा है और कयामत तक रहेगी उसे दुनिया की कोई ताकत आज आइए आप बार बार एक सवाल किया जा रहा है जैसा आप कौन सी मस्जिद में छुपे हैं कौन सी मस्जिद हम प्रवक्ता नहीं है बीच कांग्रेस के लिए का नंबर संबित पात्रा आपको बता दें कि आपको शायद खबर नहीं होगी राहुल गांधी चित्रकूट में कामतानाथ मंदिर में हाजिरी दे रहे हैं वह जाकर के पूजा कर रहे आप कुछ याद नहीं मालूम होगा क्या करे की नमाज़ क्या क्या क्या क्या क्या कोट कैसे चेंज होगा हमें बात से नहीं है मंदिर राम की जन्म तारीख मध्यप्रदेश हो रही है क्या मंदिर हिंदू धर्म सर इंतजार कर रहा है उनका इंतजार पूरा होगा कोर्ट का जो फैसला आएगा ना जाए मैं सरकार भाइयों के बीच में दरार नहीं होना चाहिए कोर्ट ने क्या कहा था क्या कहा इसको आप 50 सेकंड में समझ लीजिए लड़ाई मत लाइए देखें एक लैंड को लेकर डिस्प्यूट हुई थी वक्त प्रॉपर्टी मस्जिद की प्रॉपर्टी थी उसको सरकार ने अख्तियार किया था इस्माइल फारूकी वाला केस उसमें जब के शुरुआत ओर कोर्ट ने नहीं लिया कि जो मस्जिद होती है क्योंकि उसमें एसेंशियल पार्ट नहीं है कि नमाज अदा करने की नमाज अदा अलग जगह पर भी हो सकती है इसलिए उसको शेयर पूजा भी होती है और मेरी बात सुन बिल्कुल कंप्लीट कर लो इसको दुनिया को जाना चाहिए और मस्जिद बिल्कुल बहुत महत्वपूर्ण पाटिया अलग नहीं है इस्लाम से कोर्ट में कहा देखे मंदिर में क्या होता है मंदिर में आपको सीडी कोर्ट केस हो चुका है मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा मोती है जो भी मंदिर का विषय वस्तु होता है वह भगवान की प्रॉपर्टी होती है क्योंकि भगवान में प्राण प्रतिष्ठा करते हैं वह क्लीनिंग है जो केस हो रहा है राम लल्ला को रिप्रेजेंट हुआ रामलला विराजमान मराठी अल्लाह की तरफ से कुछ हद तक सहमत है दूसरा जो कुछ आज कोर्ट में हुआ है और अब जो यह विवाद है अयोध्या का विवादित ढांचे को लेकर विवाद है प्रॉपर्टी डिस्प्यूट टाइटल सूट है असीम का सबसे पहली बात तो देखें सबसे पहली बात तो बात स्वामी जी ने यह कही थी कल भी अभी पात्रा कर रहे हैं मस्जिद स्विफ्ट मस्जिद कैन बी ब्रोकन मंदिर भी कैन वी मंदिर के बारे में बोल दूंगी मंदिर आल्सो कैन बी ब्रोकन मंदिर और कैन बी शिफ्ट 2013 में गुजरात के गांधीनगर में मोदी जी की सरकार में मोदी जी ने एक 80 मंदिर तोड़कर शिफ्ट किए और वसुंधरा राजे ने खाली जयपुर में 1 महीने में 13 मंदिर तोड़ दिए मंदिर और सो कैन बी ब्रोकन मंदिर कैन बे शिफ्टेड इंटीग्रल पार्ट नहीं है बात तो मुझे कह दे दीजिए बहुत देर से पहुंचे उन्होंने उन्होंने हाथों से अपनी मस्जिद बनाई और उसमें उन्होंने ईट पत्थर ला कर दी उस पर काम किया तो मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने सबसे पहले मदीने में अगर कुछ बनाया तो बस इतना ही जाती है मस्जिद से अजान दी जाती है पांच वक्त आदान घर से नहीं दी जा सकती अजान पार्क में नहीं दी जा सकती तीसरी बात हमारे पैगंबर सल्लल्लाहु वाले वसल्लम औषधीय पहले खलीफा नमाज़ घर पर भी पढ़ी जा सकती है लेकिन मस्जिद में पढ़ने का ज्यादा खराब है नमाज पार्क नहीं पढ़ी जा सकती है लेकिन मस्जिद में पढ़ने का सवाब है क्या बात है नमाज़ पढ़ी जा सकती है क्या जहां रामलला इस समय विराजमान है वह नमाज पढ़ी जा सकती है इस्लाम में ऐसा का लिखकर दिखाइए मुझे आप वह मंदिर है अभी और कल मैं आपसे पूछ रहा हूं सवाल अब आप की तरफ आता है हम जवाब कब्जा कर लेंगे आप हमारी जगह का कब्जा कर लेना 1950 में देश की आजादी के बाद दूसरा सूट डाला गया और गुंडागर्दी हिंदू कर रहे हैं गुंडा करती होती ना सर कोई नहीं होता गुंडागर्दी कितनी गलत है समित पात्रा जिनके सपने में भी राम आते हैं और लीजिए सुन लीजिए जरा सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए सैयद शहाबुद्दीन कौन थे सहाबुद्दीन एक्शन कमिटी के चेयरपर्सन थे और जब वह मर जाता है जो ढांचा गिर गया उस ढांचा के गिरने से पहले जब 16 की बात चल रही थी मंदिर की बात चल रही थी आपको पता है सैयद शहाबुद्दीन ने क्या कहा सैयद शहाबुद्दीन ने कहा अगर इसका के नीचे अगर मंदिर का एक भी पोस्टर निकल कर आया कोई अंश निकल के आया तो मैं अपने हाथों से नंबर बटन बता रहा हूं अपने हाथों से मस्जिद को गिरा दूंगा और अपने हाथों से ही ट्रक के मंदिर बनाना शुरू करूंगा उनके इंतकाल के पश्चात और जब भाषा गिरा उसके बाद के के मोहम्मद जो कि एएसआई के बहुत बड़े अधिकारी थे और खुद प्रैक्टिसिंग मुस्लिम है उन्होंने पूरा का पूरा जांच किया और उसके नीचे से मंदिर का भव्य अवश्य मिला जिसके डिस को आधार बनाकर अलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया और कहा कि हां यहां पर नीचे गर्भगृह मंदिर का था तो अब खुद बताइए सैयद शहाबुद्दीन तो खुद बोल रहे हैं कि मैं गिरा देता है इस ढांचे को अगले मंदिर था इंतकाल हो गया है हैदराबाद ज्यादा हमारे हिंदू भाइयों को चॉकलेट का खाली रैपर दिखा के और उनको एक बार फिर गुमराह करने की कोशिश की जा रही है राम मंदिर का एक मुकदमा है बाबरी मस्जिद है या राम मंदिर है 1 टाइटल सूट है सुप्रीम कोर्ट पेंडिंग है उसकी डेट टुडे सुनवाई करना चाहता है 29 अक्टूबर से सुनवाई करेगा ऐसे ऐसे भाव सारे बाबूलाल बीच में आएंगे इंप्रेशन यह दिया जा रहा है सब में जीबी दूसरे लोग भी के पास अब 2 महीने में मंदिर बन जाएगा 3 महीने में मंदिर बन जाएगा 70 साल हो गए इस मुल्क में मंदिर के और भ्रमरगीत की राजनीति करते हुए और 1:30 के बाद कांग्रेस तो आज खुलकर कह रही है यह लोग खुलकर आप के कान में कह रही है तो मेरे को बात जो जानकारी नहीं है फिलहाल तो डिबेट से अदालत है दूसरी बात आपने जो राम मंदिर को चॉकलेट के खाली रैपर से कम पैसा मुझे लगता है कि आप राम मंदिर के पक्ष में हो ना हो लेकिन भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम इस देश की आस्था का विषय है खाली चॉकलेट के लेपर्ड से कंपेयर करना उनको जाए खालिद रशीद फिरंगी महली साहब है मेरे साथ साथ होता है मैं आपके पास आता हूं और आप से एक बड़ा बहुत सपाट सवाल पूछता हूं बहुत ही सीधा सवाल पूछता हूं ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट कहता है तो हम नहीं मानेंगे 1994 के फैसले को बरकरार रखता है और बड़ी बेंच को नहीं देता तो आप कहते हैं कि मस्जिद में नमाज़ अभिन्न अंग है क्यों आखिरकार बार बार विरोध की बात करते हैं कहीं ना कहीं तो कानून का पालन करना पड़ेगा क्या आपको लगता नहीं 1950 से अभी तक इस देश का बहुसंख्यक समुदाय भी सुप्रीम कोर्ट के पैसे का इंतजार कर रहा है यह आपके पास मेरे फाइल में इंफॉर्मेशन हालत है जब तलक काम के सिलसिले में ट्रिपल तलाक के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आया था बोर्ड ने बहुत ही बाजे तौर पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वीडियो विद रिस्पेक्ट द जजमेंट ऑफ द सुप्रीम कोर्ट तु जो कुछ भी कोर्ट ने कहा इस पर फिर हम लोगों ने बात कही है कि हम लोग उसका सलाम करते हैं लेकिन हमें यह है कि हम इस बात को कहेंगे मस्जिद से तो सिर्फ अल्लाह का घर है जिसको की नमाज अदा करने के लिए ही चल रहा था आप साफगोई से हर बात को कह सकते हैं यह हर बात में लेकिन आ जाता है दूसरी बात तलाक पर जब फैसला आया था और जब सरकार ने कानून बनाया आपने कानून का पुरजोर विरोध आपके हमने विरोध नहीं करा कानून कानून का आज भी विरोध करते ह ला ललिया ऐलान विरोध करते हैं और हम लोग को पूरा इस्तेमाल है कि जब इस केस को लेकर के हम लोग वोट के सामने जाएंगे तो किस केस में इतने प्लॉट है उसमें अपने आप इस केस में तब्दील क्या आपको लगता है कि कहीं भगवान राम के मंदिर का रास्ता साफ हुआ है या फिर आप पब्लिक को यह दिखाना चाहते कि रास्ता असम में अभी उतरा साफ नहीं हुआ है रास्ता जैसी जैसी बात तसलीम रहमानी साहब ने बोला जो निर्णय महत्वपूर्ण है हम क्यों है इसलिए है क्योंकि आज अगर इसको एक बड़े खंडपीठ अर्थात 7 जजों की खंडपीठ के पास भेज दिया जाता तो यह कैसे 1 साल 2 साल 3 साल और चलता स्वाभाविक रूप से उसके बाद इस के निर्णय के पश्चात की मस्जिद इंटीरियर पार्ट या नहीं उसके बाद जाकर राम रामलला के मंदिर के विषय में निर्णय होता उसके बाद वह केस चलता तो कुल मिलाकर बहुत वर्षों तक पूरा मामला टल जाता जैसा कि कई लोग चाहते हैं आज वह हुआ नहीं अब उन्हें तू बरसे यह पूरी सुनवाई होगी और देखिए कल आधार का जब विषय आया 1 दिन के अंदर हर दिन हर दिन सुनवाई के बाद मिस्ट्री उमर देशवासियों की तरह मेरा अपना पर्सनल ओपिनियन इसके ऊपर क्या बीजेपी के सरकार ऑडी ने जला के रामलीला को व्हाट्सएप ठाट पर पहुंचा देगी या फिर अभी इस पर सियासत का एक दौर चलेगा और कांग्रेस का जो कंफ्यूजन है गजब है उस पर कुछ कहना भी फिलहाल मुश्किल
#AarPaar में आज:- राम मन्दिर का रास्ता साफ़ होने का विश्र्लेषण|
मस्जिद, नमाज़ और राम मन्दिर|
क्या मन्दिर से खुलेगा सत्ता का मार्ग?|
राम नाम पर बरसेंगे वोट!|
2019 चुनाव से पहले बनेगा राम मन्दिर?|
2019 से पहले राम मन्दिर का रास्ता|
मन्दिर की राह से हटा रोड़ा?|
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